नागपुर–गोंदिया, भंडारा–गढ़चिरौली और नागपुर–चंद्रपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण में फ्लाई ऐश का होगा इस्तेमाल

गोंदियाृ- दिनांक 22अक्टूबर :- महाराष्ट्र राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी और महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) के बीच एक समझौता (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसका उद्देश्य थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली 'फ्लाई ऐश' (राख) के टिकाऊ उपयोग को बढ़ावा देना है, जिससे पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी और राज्य में बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) के विकास को गति मिलेगी। इस समझौते पर ऊर्जा राज्य मंत्री, मेघना सकोरे-बोरडीकर की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। इस MoU के तहत, जनवरी 2027 से दिसंबर 2028 के बीच पूर्वी महाराष्ट्र में प्रस्तावित एक्सप्रेसवे और खनिज परिवहन कॉरिडोर परियोजनाओं के लिए लगभग 61.7 मिलियन (6.17 करोड़) मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का उपयोग किया जाएगा।

इस MoU पर महाराष्ट्र राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक राधाकृष्णन बी. तथा MSRDC के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अनिलकुमार बी. गायकवाड़ ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर महाजेनको के निदेशक (परियोजनाएं) अभय हरने, महाजेनको के कार्यकारी निदेशक (पर्यावरण) डॉ. नितिन वाघ, और MSRDC के मुख्य प्रबंधक (पर्यावरण) नरेंद्र टोके सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे। इस समझौते के माध्यम से, महाराष्ट्र राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी के कोराडी, खापरखेड़ा और चंद्रपुर थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली फ्लाई ऐश का उपयोग राज्य भर की प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में किया जाएगा। अनुमानित आवश्यकताओं में नागपुर-गोंदिया एक्सप्रेसवे के लिए 20.9 मिलियन (2.09 करोड़) मीट्रिक टन, भंडारा-गढ़चिरौली एक्सप्रेसवे के लिए 11.4 मिलियन (1.14 करोड़) मीट्रिक टन, नागपुर-चंद्रपुर एक्सप्रेसवे के लिए 27.9 मिलियन (2.79 करोड़) मीट्रिक टन, और नवेगांव मोरे-सुरजागढ़ खनिज परिवहन कॉरिडोर के लिए 0.15 मिलियन (0.15 करोड़) मीट्रिक टन फ्लाई ऐश शामिल है। नागपुर क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए फ्लाई ऐश कोराडी या खापरखेड़ा थर्मल पावर प्लांट से ली जाएगी, जबकि चंद्रपुर क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए फ्लाई ऐश की आपूर्ति चंद्रपुर थर्मल पावर प्लांट से की जाएगी। इस्तेमाल की जाने वाली राख की मात्रा, परियोजनाओं की तकनीकी जरूरतों, साइट की वास्तविक स्थितियों और राख की उपलब्धता के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। संबंधित थर्मल पावर स्टेशन, MSRDC और अधिकृत ठेकेदार या संबंधित इकाई के बीच अलग-अलग त्रिपक्षीय समझौते किए जाएंगे। इन समझौतों में परियोजना के अनुसार राख की मात्रा, उसे उठाने का शेड्यूल, राख के स्रोत, परिवहन की व्यवस्था और वित्तीय सहायता की शर्तें तय की जाएंगी। वित्तीय सहायता के दावों पर तभी विचार किया जाएगा, जब राख की मात्रा मापी जा चुकी हो, उसके इस्तेमाल की पुष्टि हो गई हो और जरूरी दस्तावेजों का सत्यापन हो चुका हो। राख की खुदाई, परिवहन, हैंडलिंग और इस्तेमाल से जुड़ी सभी गतिविधियां पर्यावरण नियमों, तकनीकी मानकों और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप होनी चाहिए। इस सहयोग का मुख्य उद्देश्य 100% राख का इस्तेमाल सुनिश्चित करना है। यह केंद्र सरकार के 31 दिसंबर 2021 के 'फ्लाई ऐश नोटिफिकेशन' और राज्य सरकार की 19 सितंबर 2025 की 'ऐश यूटिलाइजेशन पॉलिसी' (राख उपयोग नीति) के अनुरूप है। यह समझौता ज्ञापन (MoU) थर्मल पावर स्टेशनों में जमा पुरानी राख के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल में मदद करेगा, जिससे लंबे समय तक राख जमा रखने से जुड़े पर्यावरणीय और परिचालन संबंधी जोखिम कम होंगे। इसके अलावा, यह पूरे राज्य में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स) में राख के टिकाऊ इस्तेमाल के लिए एक रूपरेखा तैयार करेगा। यह समझौता 31 मार्च 2032 तक, या संबंधित परियोजनाओं के पूरा होने तक (जो भी पहले हो), लागू रहेगा। दोनों संगठनों के सक्षम अधिकारियों की मंजूरी से इस समझौते की अवधि बढ़ाई जा सकती है।