75 की उम्र में नाना पाटेकर ने दुनिया को कहा अलविदा......                       

पूणे - नाना पाटेकर के बेटे मल्हार पाटेकर ने आज सुबह मिडिया को बताया कि नाना पाटेकर का निधन हो गया था। खबर मिलने के बाद परिवार पूणे से गोवा के लिए निकला है। किसी निजी काम के सिलसिले में नाना गोवा में थे। नाना पाटेकर का पार्थिव शरीर दोपहर के बाद पुणे लाया गया। नाना पाटेकर के बेटे मल्हार पाटेकर ने यह जानकारी दी।अभिनेता नाना पाटेकर ने 75 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया। डोना पाउला के एक निजी अस्पताल में दिग्गज अभिनात का निधन हो गया। वे गोवा के डोना पाउला स्थित अपने घर पर बेहोश पाए गए और उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि नाना पाटेकर को गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया था, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल पहुंचाए जाने के बाद डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक उन्हें होश में लाने की कोशिश की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।वास्तविक नाम विश्वनाथ से 'नाना' बनने की कहानी -दुनिया उन्हें नाना पाटेकर के नाम से जानती है, लेकिन यह नाम जन्म से नहीं था। खुद नाना ने एक इंटरव्यू में इस राज का खुलासा किया। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया, “मेरी मां की एक सहेली थी, जो बिल्कुल बहन जैसी थी। बचपन में वो मुझे नाना-नाना कहा करती थी। बस यहीं से मेरा नाम नाना पाटेकर पड़ गया। अच्छा नाम है। पासपोर्ट, आधार कार्ड और हर डॉक्यूमेंट पर यही नाम है।” इस सरल लेकिन भावनात्मक वजह ने उनका पूरा पहचान बदल दी। घर में मां की सहेली उन्हें प्यार से ‘नाना’ बुलाती थीं। धीरे-धीरे परिवार और आसपास के लोग भी उन्हें इसी नाम से पुकारने लगे। विशू कहने पर ऐसा होता था रिएक्शन- स्कूल में उन्हें विश्वनाथ या 'विशू' कहा जाता था। नाना खुद कहते हैं कि अगर आज कोई उन्हें ‘विशू’ कहकर बुलाए तो उन्हें तुरंत समझ आ जाता है कि वो उनके स्कूल के दिनों का कोई पुराना परिचित है। समय के साथ ‘नाना’ नाम इतना प्रचलित हो गया कि उन्होंने पुराना नाम छोड़कर इसे ही अपना लिया। आज उनके सभी आधिकारिक दस्तावेजों—पासपोर्ट, आधार कार्ड और अन्य पेपर्स—पर नाना ही लिखा है। उन्होंने साफ कहा कि उन्हें यह नाम बहुत पसंद है।फैन्स के चहेते 'नाना' - आज जब नाना पाटेकर स्क्रीन पर नजर आते हैं तो दर्शक उन्हें ‘नाना’ कहकर ही संबोधित करते हैं। लेकिन उनके पीछे विश्वनाथ नाम का एक साधारण लड़का छिपा है, जिसे मां की सहेली के प्यार ने ‘नाना’ बना दिया। यह कहानी न सिर्फ उनके फैंस के लिए दिलचस्प है, बल्कि यह याद दिलाती है कि नाम कितना भी बड़ा हो जाए, उसकी जड़ें अक्सर बहुत गहरी होती है।                      हिंदी सिनेमा में नाना - नाना पाटेकर ने हिंदी सिनेमा के सबसे बेहतरीन अभिनेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने 1978 में अपना एक्टिंग डेब्यू किया था और उनकी पहली फिल्म 'गमन' थी। लेकिन, 1986 में रिलीज हुई 'अंकुश' ने उन्हें पहचान दिलाई। उन्होंने अपने करियर में हिंदी के साथ-साथ मराठी सिनेमा में भी काम किया। 'परिंदा', 'तिरंगा', 'क्रांतिवीर' और 'खामोशी' जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने दर्शकों के दिलों में जगह बनाई और अपने अभिनय का लोहा मनवाया। उन्होंने अपने करियर में सिर्फ संजीदा ही नहीं, कॉमिक और नकारात्मक किरदार भी निभाए। 'परिंदा' में एक गैंगस्टर के किरदार ने उन्हें इंडस्ट्री में स्थापित किया और फिर 'प्रहार', 'तिरंगा' और 'क्रांतिवीर' जैसी फिल्मों में एक्शन अवतार दिखाया।                                                                                                        फिल्म कैरियर-नाना पाटेकर की फिल्मों की बात करें तो 2025 में उन्हें 'हाउसफुल 5' में देखा गया था, जिसमें उनके साथ अक्षय कुमार, रितेश देशमुख, अभिषेक बच्चन, जैकलीन फर्नांडिस, चित्रांगदा सिंह और नरगिस फाखरी जैसे कलाकार भी नजर आए थे। इसके बाद नाना पाटेकर शाहिद कपूर स्टारर 'ओ रोमियो' और अनिल कपूर की 'सूबेदार' में स्पेशल अपीयरेंस में दिखे।                                           सोशल मिडिया से साभार........