लंबित धान बोनस तुरंत दें सरकार, 2-3 दिन में हो चुकारे का भुगतान : विधायक विनोद अग्रवाल
मंत्रालय में हुई बैठक में धान खरीदी का लक्ष्य बढ़ाने, अकाल के संकट में किसानों को तत्काल राहत देने पर जोर
गोंदिया। धान उत्पादक किसानों के लिए लंबित धान बोनस तत्काल जारी करने और धान बिक्री के चुकारे किसानों को 2-3 दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने की मांग को लेकर विधायक विनोद अग्रवाल ने बुधवार, 7 अक्टूबर को मुंबई मंत्रालय में अन्न, नागरी, पुरवठा व ग्राहक संरक्षण मंत्री छगन भुजबल की अध्यक्षता में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में किसानों की जोरदार पैरवी की। विधायक अग्रवाल ने इस बैठक में धान खरीदी से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार का ध्यान केंद्रित किया।
विधायक अग्रवाल ने धान के चुकारे में होने वाली देरी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि किसान अपनी उपज शासन को बेचने के बाद लंबे समय से भूगतान की प्रतीक्षा कर रहा है। खेती की अगली जरूरतों, घरेलू खर्च और आर्थिक दायित्वों के लिए किसानों को तत्काल पैसों की आवश्यकता होती है। इसलिए धान के चुकारे का भुगतान अधिकतम 2-3 दिनों के भीतर किया जाना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बोनस और चुकारे को लेकर किसानों को किसी प्रकार की अनिश्चितता में नहीं रखा जाना चाहिए। लंबित बोनस तत्काल मिले और धान बिक्री का पैसा 2-3 दिनों में किसान के खाते में पहुंचे, इसके लिए शासन स्तर पर ठोस एवं समयबद्ध व्यवस्था किए जाने की आवश्यकता है।
बैठक में विधायक अग्रवाल ने धान खरीदी का लक्ष्य बढ़ाने की मांग भी रखी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान धान उत्पादन पर निर्भर हैं और वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए निर्धारित खरीदी लक्ष्य पर्याप्त नहीं है। इसलिए धान खरीदी का लक्ष्य बढ़ाया जाए, ताकि अधिक से अधिक किसानों का धान शासकीय खरीदी केंद्रों के माध्यम से खरीदा जा सके और उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए परेशानी न उठानी पड़े।
इसके साथ ही विधायक ने धान खरीदी संस्थाओं को मिलने वाली घट-बढ़ की व्यवस्था में वृद्धि किए जाने की आवश्यकता से भी शासन को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि खरीदी केंद्रों का संचालन सुचारु रहने और किसानों को समय पर सेवा उपलब्ध कराने, किसानों की होने वाली लूट के लिए संस्थाओं की व्यावहारिक समस्याओं का निराकरण जरूरी है।
विधायक विनोद अग्रवाल ने शासन से आग्रह किया कि लंबित धान बोनस का तत्काल भुगतान, 2-3 दिनों में चुकारे की व्यवस्था और धान खरीदी का बढ़ा हुआ लक्ष्य किसानों को राहत देने की प्राथमिकता में शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि अकाल और आर्थिक संकट से जूझ रहे धान उत्पादक किसानों के लिए यह समय तत्काल राहत देने का है और शासन के निर्णयों में किसानों की आर्थिक मजबूरी को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

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