पानगांव ग्राम पंचायत के खिलाफ अचानक ‘हल्लाबोल’, अतिक्रमण के मुद्दे पर सियासत गरम




साखरीटोला | आमगांव। - आमगांव तहसील के पानगांव-रामपुर ग्राम पंचायत में अतिक्रमण के मुद्दे को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक रंग लेता दिखाई दे रहा है। ग्राम पंचायत के कामकाज को लेकर कुछ नागरिकों द्वारा सवाल उठाए जाने के बीच करीब 50 से 60 लोगों के एक साथ ग्राम पंचायत परिसर में पहुंचने से गांव में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। 

ग्राम पंचायत की ओर से कहा गया है कि नागरिकों को अपनी समस्या रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन किसी भी मामले को लेकर बड़ी संख्या में लोगों का अचानक एकत्रित होकर पंचायत कार्यालय पहुंचना उचित प्रक्रिया नहीं है।

गांव के कुछ नागरिकों का आरोप है कि अतिक्रमण जैसे स्थानीय प्रशासनिक मुद्दे को राजनीतिक रूप देने का प्रयास किया जा रहा है। कुछ ग्रामीणों ने यह आशंका भी व्यक्त की कि ग्राम पंचायत के खिलाफ माहौल बनाने के पीछे कुछ राजनीतिक लोगों की भूमिका हो सकती है। हालांकि इस संबंध में किसी राजनीतिक दल अथवा व्यक्ति की ओर से आधिकारिक रूप से ऐसी कोई भूमिका स्वीकार नहीं की गई है और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हुई है।

ग्राम पंचायत को नहीं थी पूर्व सूचना

पूरे मामले को लेकर सरपंच मंगला प्रेमलाल कोरे से जानकारी लेने पर उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्राम पंचायत को इस तरह बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होकर आने की पहले से कोई जानकारी नहीं थी।उन्होंने बताया कि मोबाइल फोन के माध्यम से संपर्क होने के बाद उन्हें इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी मिली।

 सरपंच ने कहा कि ग्राम पंचायत में आकर अपनी समस्या रखना किसी भी नागरिक के लिए गलत नहीं है, क्योंकि ग्राम पंचायत जनता की संस्था है और जनता के प्रतिनिधि के रूप में उन्हें नागरिकों की समस्याएं सुनना ही है।उन्होंने कहा कि गांव के नागरिकों ने ही अपने मतों से प्रतिनिधियों को चुनकर जिम्मेदारी सौंपी है। इसलिए नागरिकों की समस्याओं का समाधान करना ग्राम पंचायत की प्राथमिक जिम्मेदारी है। लेकिन जिम्मेदार पद पर रहते हुए किसी भी प्रकार की ऐसी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए, जिससे गांव में तनाव अथवा अप्रिय स्थिति पैदा हो।

अचानक ‘50-60 लोग आए, अगर कोई घटना होती तो जिम्मेदारी किसकी?’

सरपंच मंगला कोरे ने पूरे घटनाक्रम के दौरान सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के पहलू पर भी सवाल उठाया।उन्होंने कहा कि यदि ग्राम पंचायत को किसी प्रकार की पूर्व सूचना नहीं थी और अचानक 50 से 60 लोग एक साथ पंचायत परिसर में पहुंचते हैं तथा इस दौरान किसी व्यक्ति के साथ कोई अप्रिय घटना घट जाती, तो आखिर इसकी जिम्मेदारी किसकी होती?

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए आवेदन, निवेदन, ग्रामसभा अथवा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष शिकायत जैसे वैधानिक माध्यम उपलब्ध हैं। समस्याओं को इन्हीं माध्यमों से सामने लाना अधिक उचित है।

अतिक्रमण के मामले में पंचायत की प्रक्रिया जारी

ग्राम पंचायत की ओर से स्पष्ट किया गया है कि गांव में अतिक्रमण के मुद्दे को नजरअंदाज नहीं किया गया है। 

अतिक्रमण से संबंधित मामलों में ग्राम पंचायत की ओर से संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं और नियमानुसार आगे की प्रक्रिया की जा रही है।

सरपंच ने कहा कि जहां भी नियमों के विपरीत अतिक्रमण पाया जाएगा, वहां संबंधित नियमों एवं प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाएगी। 

ग्राम पंचायत किसी व्यक्ति विशेष के पक्ष में खड़ी नहीं है, बल्कि उपलब्ध दस्तावेजों और नियमों के आधार पर कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है।

गांव नमूना नंबर 8 के मामले में न्यायालयीन आदेश का हवाला

एक व्यक्ति को दिए गए गांव नमूना नंबर 8 को लेकर भी कुछ नागरिकों द्वारा सवाल उठाए गए हैं। इस संबंध में सरपंच के पति प्रेमलाल कोरे ने बताया कि संबंधित व्यक्ति द्वारा न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त किया गया है।

ऐसे में न्यायालयीन प्रक्रिया का सम्मान करते हुए आगे की कार्रवाई किया जाना आवश्यक है।

 ग्राम पंचायत की ओर से स्पष्ट किया गया कि न्यायालय से संबंधित किसी मामले में नियम और न्यायालयीन आदेश के अनुसार ही आगे बढ़ा जा सकता है।

सरपंच पति पर लगाए आरोपों से इनकार

सरपंच मंगला कोरे के पति प्रेमलाल कोरे पर ग्राम पंचायत के प्रशासनिक कामकाज में हस्तक्षेप करने के आरोप भी कुछ नागरिकों द्वारा लगाए गए हैं। प्रेमलाल कोरे ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए पूरी तरह खारिज किया है।

उन्होंने कहा कि वे ग्राम पंचायत के किसी भी प्रशासनिक कामकाज में हस्तक्षेप नहीं करते। अतिक्रमण हटाने की मांग का वे भी समर्थन करते हैं।

 उन्होंने यह भी कहा कि गांव नमूना नंबर 8 से संबंधित मामले में संबंधित व्यक्ति न्यायालय से स्थगन आदेश लेकर आया है।

मेरे पति का पंचायत के काम में कोई हस्तक्षेप नहीं’—सरपंच

सरपंच मंगला कोरे ने भी अपने पति पर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पंचायत के कामकाज में उनके पति का कोई हस्तक्षेप नहीं है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उन्हें पंचायत के किसी कार्य से गोंदिया जाना पड़ता है तो उनके पति उनके साथ जाते हैं, लेकिन केवल साथ जाने का अर्थ यह नहीं है कि वे ग्राम पंचायत के प्रशासनिक निर्णयों अथवा कामकाज में हस्तक्षेप करते हैं।

सरपंच ने कहा कि ग्राम पंचायत का कामकाज निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जा रहा है और किसी भी व्यक्ति को पंचायत के अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर निर्णय लेने का अधिकार नहीं है।

अफवाहों से गांव का माहौल खराब न करें’

सरपंच मंगला कोरे ने गांव के सभी नागरिकों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

उन्होंने कहा कि गांव में किसी भी प्रकार की अफवाह फैलाकर माहौल खराब करने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि किसी नागरिक को ग्राम पंचायत के कामकाज को लेकर शिकायत है तो वह लिखित रूप में पंचायत के समक्ष अपनी शिकायत प्रस्तुत करे।

 शिकायत मिलने के बाद नियमानुसार उसकी जांच और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने राजनीतिक लोगों से भी अपील करते हुए कहा कि व्यक्तिगत या राजनीतिक मतभेदों के कारण गांव का वातावरण खराब नहीं होना चाहिए। 

पंचायत जनता की संस्था है और उसका उद्देश्य गांव का विकास तथा नागरिकों की समस्याओं का समाधान करना है।

राजनीतिक हस्तक्षेप की चर्चा, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं

50 से 60 लोगों के एक साथ ग्राम पंचायत पहुंचने को लेकर गांव में राजनीतिक चर्चा भी तेज हो गई है। 

कुछ नागरिकों का कहना है कि पंचायत के खिलाफ इस तरह का माहौल तैयार करने के पीछे कुछ स्थानीय राजनीतिक लोगों का हाथ हो सकता है और विरोधी पक्ष द्वारा पंचायत को घेरने की रणनीति अपनाई जा रही है।

हालांकि यह कुछ नागरिकों द्वारा व्यक्त किया गया आरोप और संदेह मात्र है। इस संबंध में किसी राजनीतिक दल या संबंधित व्यक्ति की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसलिए इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

पंचायत की दो टूक—‘आरोप नहीं, दस्तावेजों के आधार पर होगी कार्रवाई’

ग्राम पंचायत की ओर से स्पष्ट किया गया है कि अतिक्रमण हो या ग्राम पंचायत से जुड़ा कोई अन्य विषय, कार्रवाई किसी दबाव, राजनीतिक हस्तक्षेप अथवा आरोप-प्रत्यारोप के आधार पर नहीं, बल्कि नियम, दस्तावेज और प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।

पंचायत का कहना है कि यदि किसी नागरिक के पास किसी मामले से संबंधित ठोस दस्तावेज अथवा शिकायत है तो वह उसे आधिकारिक रूप से प्रस्तुत करे। ग्राम पंचायत कानून और नियमों के दायरे में रहकर उस पर कार्रवाई करने के लिए तैयार है।

अब प्रशासनिक कार्रवाई पर निगाहें

पानगांव-रामपुर में अतिक्रमण के मुद्दे से शुरू हुआ विवाद अब ग्राम पंचायत के कामकाज और कथित राजनीतिक हस्तक्षेप तक पहुंच गया है। एक ओर कुछ नागरिकों द्वारा ग्राम पंचायत के खिलाफ शिकायतें और आरोप लगाए जा रहे हैं, तो दूसरी ओर सरपंच एवं ग्राम पंचायत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अपने कामकाज को नियमानुसार बताया है।

अब इस पूरे मामले में प्रशासन द्वारा शिकायतों, पंचायत के रिकॉर्ड, अतिक्रमण संबंधी दस्तावेजों, जारी की गई नोटिसों तथा अन्य संबंधित अभिलेखों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

फिलहाल ग्राम पंचायत ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों और राजनीतिक विवाद से दूर रहें तथा गांव के विकास और समस्याओं के समाधान के लिए कानूनी एवं लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन करें।