‘एआई’ मॉड्यूल से महावितरण का बिजली चोरों पर सर्जिकल स्ट्राइक; 3 महीनों में 28 हजार बिजली चोरियों का पर्दाफाश
गोंदिया, दि. 10 सितंबर 2026: बिजली चोरी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में महावितरण ने अब ‘एआई’ की ‘सुपर इंटेलिजेंस’ का इस्तेमाल करते हुए बिजली चोरों पर सर्जिकल स्ट्राइक शुरू कर दिया है। कुल 190 से अधिक विशेष उड़न दस्तों द्वारा बिजली कनेक्शनों की जांच तथा ‘एआई’ मॉड्यूल के सूक्ष्म विश्लेषण के माध्यम से पिछले तीन महीनों में 66 करोड़ 28 लाख रुपये की 27 हजार 964 बिजली चोरियों का पर्दाफाश हुआ है। अब तक बिजली चोरी एवं समझौता शुल्क की राशि का भुगतान नहीं करने वाले 289 मामलों में आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं।
बिजली चोरी के खिलाफ पारंपरिक जांच के साथ-साथ महावितरण ने अब हाईटेक अभियान शुरू किया है। इसके लिए सीधे ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ और ‘मशीन लर्निंग’ का उपयोग कर बिजली चोरी की सटीक भविष्यवाणी करने वाला मॉड्यूल तैयार किया गया है। बिजली ग्राहकों अथवा संबंधित क्षेत्र में बिजली उपयोग के पुराने आंकड़े, अचानक कम या अधिक हुई बिजली की मांग, मीटर में तकनीकी छेड़छाड़ तथा 50 से अधिक अन्य तकनीकी मानकों का यह मॉड्यूल 24 घंटे सूक्ष्म विश्लेषण कर रहा है। जिन ग्राहकों के बिजली उपयोग में संदिग्ध अंतर पाया जाता है, उन ग्राहकों को यह ‘एआई’ मॉड्यूल ‘हाई-रिस्क’ श्रेणी में रखता है। इससे बिना किसी पूर्व जांच के बिजली चोरी होने वाले स्थान की सटीक जानकारी इस मॉड्यूल के माध्यम से उपलब्ध हो रही है।
‘एआई’ की ‘सुपर इंटेलिजेंस’ का उपयोग कर बिजली चोरी के स्थानों की जांच के लिए महावितरण के राज्यभर में 190 से अधिक विशेष उड़न दस्ते कार्यरत हैं। बिजली चोरी के खिलाफ कार्रवाई में कहीं भी लापरवाही न हो, इसके लिए बिजली कनेक्शनों की जांच से लेकर बिजली बिल जारी करने तक की पूरी प्रक्रिया ‘थीफ्ट ट्रैकिंग एंड मॉनिटरिंग सिस्टम’ के माध्यम से पूरी तरह ऑनलाइन की गई है। इसके लिए एक स्वतंत्र मोबाइल ऐप विकसित किया गया है। बिजली चोरी के स्थान से लेकर जांच के लाइव फोटो, डिजिटल पंचनामा, मौके पर ही बिजली आपूर्ति खंडित करना तथा दंडात्मक बिलों की वसूली तक की पूरी जानकारी इस ऐप में रियल-टाइम अपडेट की जा रही है। इससे कार्रवाई में अत्यधिक पारदर्शिता और गति आई है।
पिछले जून से अगस्त इन तीन महीनों के दौरान महावितरण के अंतर्गत संवसु विभाग तथा सुरक्षा एवं प्रवर्तन विभाग के नियमित और विशेष दस्तों ने छत्रपति संभाजीनगर प्रादेशिक विभाग में 5 हजार 83, कोकण में 11 हजार 83, नागपुर में 5 हजार 949 और पुणे प्रादेशिक विभाग में 5 हजार 849, इस प्रकार कुल 27 हजार 964 बिजली चोरियों का पर्दाफाश किया है। इनमें से 24 हजार 508 बिजली चोरियों के मूल्यांकन से 66 करोड़ 28 लाख रुपये की बिजली चोरी किए जाने की पुष्टि हुई है तथा संबंधितों को उसका बिजली बिल जारी किया गया है। अब तक बिजली चोरी के बिलों के रूप में 10 हजार 810 मामलों में 29 करोड़ 85 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। यदि बिजली चोरी की पूरी राशि का समझौता शुल्क सहित निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया जाता है, तो संबंधित बिजली चोरों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जा रही है। अब तक 289 मामलों में धारा 135 के तहत आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। बिजली चोरी के अपराध के लिए तीन वर्ष तक के कारावास और जुर्माने की सजा का प्रावधान है।
श्री. लोकेश चंद्र (मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव तथा अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, महावितरण):
‘अगले तीन वर्षों में महावितरण की तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानि को 10 प्रतिशत से कम करने का लक्ष्य है। इसके लिए बिजली बिलों की बकाया वसूली को प्राथमिकता देते हुए बिजली चोरी के खिलाफ जोरदार अभियान शुरू किया गया है। बिजली चो2री के मामलों का पर्दाफाश करने के लिए ‘एआई’ मॉड्यूल विकसित किया गया है। इसके माध्यम से बिजली चोरी के खिलाफ कार्रवाई को और अधिक तीव्र एवं सटीक बनाया गया है।’
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