गोंदिया - सी.पी,एंड़ बेरार के समय,गोंदिया की शान रहे , स्वतंत्रता सेनानी स्व. सुखदेव सालीग्रामजी अग्रवाल के जीवन के प्रेरणा दायक पलों को संजोने और जन सामान्य तक उनके विचारों की अनुभूती पहुँचाने की एक शानदार कोशिश , उनके पोतों द्वारा एक प्रेस कान्फ्रेस के माध्यम से आज दि.16 अगस्त 2026 को , बादलों के पीछे एक छिपे हुए तारे के दिव्य-प्रकाश के फैलने की शुरुवात के रुप में हो गई है।
उनके परिजनों ने प्रेस कान्फ्रेस में बताया कि स्वतंत्रता सेनानी स्व. सुखदेवजी सालीग्रामजी अग्रवाल के जीवन- दर्शन को जनसामान्य के सामने लाने के विचार से , एक लंबे समय तक परिवार के सभी सदस्य उनके जीवन काल में हुए सत्याग्रह और स्वतंत्रता संग्राम में योगदान ,सामाजिक और जनसेवा के कार्य के साथ-साथ राजनीतिक जीवन से संबधी जानकारियों को संग्रहित करने में लगे रहे और आज उनके जीवन से संबधित लगभग सारी जानकारी व उन स्मृतियों को जीवित रखने किए जाने वाली योजनाओं से संबधित जानकारी दी है।उनकी 125वीं जयंती 2 सितंबर 2026 को श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई जाएगी। इस अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
जयंती समारोह को लेकर 16 अगस्त 2026 को आयोजित पत्रकार परिषद में आयोजकों ने बताया कि 125वीं जयंती समारोह का उद्देश्य नई पीढ़ी को स्वर्गीय सुखदेवजी अग्रवाल के संघर्ष, स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान, राष्ट्रसेवा एवं समाजसेवा के कार्यों से परिचित कराना तथा उनके प्रेरणादायी जीवन और योगदान को स्मरण करना है। नागरिकों से 2 सितंबर को आयोजित होने वाले जयंती समारोह में अधिक से अधिक संख्या में सहभागी होकर स्वतंत्रता सेनानी एवं समाजसेवी स्वर्गीय सुखदेवजी अग्रवाल को श्रद्धांजलि अर्पित करने का आह्वान किया गया।
स्वर्गीय सुखदेवजी सालीग्रामजी अग्रवाल की जीवनी -
2 सितम्बर, 1901को गोंदिया (महाराष्ट्र) में जन्मे, तथा 83 वर्ष की आयु में वे 15 जनवरी, 1984 को स्वर्गवासी हो गए।उन्होंने“सत्य, सेवा और समाज के उत्थान के लिए समर्पित एक प्रेरणास्रोत जीवन” जिया। वे एक धार्मिक और संस्कारी परिवार में जन्मे, जिन्होंने अपने जीवन में सत्य और सादगी और समाज की सेवा को अपनाया। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी शिक्षा प्राप्त की और सामाजिक कार्यों में रुचि लेना प्रारंभ किया।
देश की आजादी में सत्याग्रह और स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देते रहे। वे महात्मा गांधीजी के विचारों से प्रभावित होकर स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े थे। 1923 में “ध्वज सत्याग्रह” के दौरान उन्हें 6 महीनों का कारावास हुआ। 1930 के नमक सत्याग्रह और 1940-41 के व्यक्तिगत सत्याग्रह में सत्याग्रही के रूप में भाग लिया तथा ₹200 का जुर्माना एवं जेल में 6 महीने की सजा हुई। स्वतंत्रता संग्राम के लिए उन्हें कुल 6 महीनों का कठोर कारावास भुगतना पड़ा।
सामाजिक और जनसेवा के कार्य में वे सदैव अग्रणी भूमिका निभाते रहे। राष्ट्रीय कार्यों में व्यस्त रहते हुए भी उन्होंने समाज सेवा को नहीं छोड़ा। गोंदिया में सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन, विधवा विवाह प्रोत्साहन, और कन्या विवाह में सहायता प्रदान की। दीन-हीनों और जरूरतमंदों की सहायता के लिए हमेशा आगे रहे।
उनके राजनीतिक जीवन की बात करे तो 1933 में गोंदिया नगरपालिका के प्रशासकीय पार्षद बने। 1937 में कार्यकारिणी के उपाध्यक्ष तथा शिक्षा नियुक्त हुए। 1938 में भंडारा जिला परिषद के उपाध्यक्ष चुने गए। 1940 में व्यक्तिगत सत्याग्रह के समय दिए गए त्यागपत्र के कारण उनका पद खाली हुआ। 1956 से 1962 तक बम्बई राज्य (तत्कालीन) एवं महाराष्ट्र राज्य के विधायक रहे।
स्वतंत्रता के बाद उन्हे कई प्रमुख पदों एवं सम्मान से नवाजा गया जिसमें ऑल इंडिया कंट्रोल बोर्ड (C.P.S. & Berar) के सदस्य। राँची की ‘लाख समिति’ एवं कलकत्ता का ‘एक्सपोर्ट प्रमोशन कार्यालय’ के सदस्य। ‘लाख विकास बोर्ड’ के सदस्य। मध्य प्रदेश की ‘लाख चपड़ा टार्जिन विकास समिति’ के लगभग 20 वर्षों तक अध्यक्ष।‘नव संदेश’, नागपुर प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष भी बनाए गए।
व्यक्तित्व की विशेषताएँ - सरल, शांत और सत्य के प्रति अडिग। समाज और राष्ट्र के प्रति निष्ठा और समर्पण की मिसाल। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।
यह जानकारी देते हुए उनके परिवार के सदस्यों सचिन अग्रवाल, शिवा अग्रवाल,सौरभ अग्रवाल ,कमलकिशोर अग्रवाल,आशीष अग्रवाल, शरद अग्रवाल, छेत्रपाल अग्रवाल, पवन अग्रवाल और आशीष अग्रवाल ने एक स्वर में कहा कि उनके जीवन-संदेश के आधार पर ही हमारे परिवार की नींव टिकी हुई है और स्वर्गीय सुखदेवजी अग्रवाल का जीवन त्याग, तपस्या, सेवा और सत्य का प्रतीक था। उनकी स्मृतियाँ सदैव हमारे हृदयों में जीवित रहेंगी।

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