अफडेट- मामला पारिवारिक संपत्ति विवाद का
मुकेशकुमार कारडा को हाईकोर्ट से मिली सशर्त अंतरिम राहत
गोंदिया- फर्जी एवं कूटरचित पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए संपत्ति से जुड़े दस्तावेज तैयार करने और विक्रय किए जाने के आरोपों से जुड़े मामले में मुकेशकुमार कारडा को बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ से अंतरिम राहत जरूर मिली है, लेकिन इस राहत के साथ जांच की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो गई है। न्यायमूर्ति प्रवीण एस. पाटिल ने 7 अगस्त 2026 को मामले की सुनवाई करते हुए मुकेशकुमार कारडा को अंतरिम संरक्षण प्रदान किया, राज्य को नोटिस जारी किया और अगली सुनवाई 21 अगस्त 2026 को निर्धारित की है।
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अंतरिम राहत को आरोपों से क्लीन चिट नहीं माना जा सकता। मामले की जांच जारी रहेगी और अब दस्तावेजों, बैंकिंग रिकॉर्ड, गवाहों तथा कथित पावर ऑफ अटॉर्नी की वास्तविकता से जुड़े सवालों के जवाब तलाशना जांच एजेंसी के लिए महत्वपूर्ण होगा।
हाईकोर्ट की राहत के साथ सख्त शर्तें भी जोड़ी है - हाईकोर्ट ने अंतरिम संरक्षण देते हुए यह सुनिश्चित किया है कि जांच प्रक्रिया प्रभावित न हो।मुकेशकुमार कारडा को प्रत्येक बुधवार सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक गोरेगांव पुलिस स्टेशन में उपस्थित रहकर जांच अधिकारी के साथ सहयोग करना होगा। यह शर्त चार्जशीट दाखिल होने तक लागू रहेगी। इसके अलावा—गवाहों को प्रभावित नहीं करना , किसी प्रकार की धमकी या प्रलोभन नहीं देना ,जांच में बाधा नहीं डालनी, साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करनी होगी। पता और मोबाइल नंबर की जानकारी जांच अधिकारी एवं न्यायालय को देनी होगी। इस मामले में सवाल यह है कि मूल दस्तावेज क्या कहते हैं, बैंक रिकॉर्ड क्या बताते हैं, गवाह क्या बताते हैं और इन सवालों के जवाब ही तय करेंगे कि मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।
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