​ऊर्जा क्षेत्र में योगदान के लिए महावितरण के अध्यक्ष श्री लोकेश चंद्र राष्ट्रीय परिषद में विशेष रूप से सम्मानित


​गोंदिया, 23 जुलाई 2026: नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) को अपनाने, ऊर्जा दक्षता और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए बिजली वितरण क्षेत्र में उत्कृष्ट नेतृत्व प्रदान करने हेतु माननीय मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव तथा महावितरण के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री लोकेश चंद्र को बुधवार (22 तारीख) को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

नई दिल्ली में आयोजित ‘टाइम्स नेटवर्क सस्टेनेबिलिटी कॉन्क्लेव’ (Times Network Sustainability Conclave) की मुख्य थीम ‘भारत 2035: एक आत्मनिर्भर राष्ट्र’ थी। इस कॉन्क्लेव में इस बात पर गहन विचार-विमर्श किया गया कि भारत 2035 तक हरित प्रतिबद्धता और सतत (शाश्वत) ऊर्जा के बल पर कैसे आत्मनिर्भर बन सकता है। इस सम्मेलन में ऊर्जा विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती आभा शुक्ला का विशेष साक्षात्कार भी लिया गया।

​महाराष्ट्र को स्वच्छ और हरित ऊर्जा की ओर ले जाने के लिए मुख्यमंत्री माननीय श्री देवेंद्र फडणवीस के मार्गदर्शन में विभिन्न योजनाएं और परियोजनाएं चलाई जा रही हैं। हरित ऊर्जा परिवर्तन के माध्यम से सभी को सस्ती और निर्बाध (सतत) बिजली आपूर्ति के साथ-साथ बिजली क्षेत्र में बुनियादी सुधारों को मुख्यमंत्री श्री फडणवीस ने गति दी है। ऊर्जा विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती आभा शुक्ला ने ऊर्जा परिवर्तन के लिए ‘रिसर्स एडेक्वेसी प्लान’ (Resource Adequacy Plan) तैयार किया है, वहीं इस रूपरेखा (आराखडे) के कार्यान्वयन को मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव एवं महावितरण के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक श्री लोकेश चंद्र ने सक्रियता से गति प्रदान की है।

​महाराष्ट्र की बिजली नियोजन योजना के तहत 2030 तक क्षमता में 45,000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली जोड़ने का लक्ष्य है। इसमें से 38,000 मेगावाट बिजली हरित स्रोतों से प्राप्त कर कुल ऊर्जा में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक करने का ध्येय रखा गया है। इसी के अनुरूप, महावितरण ने सस्ती और सतत बिजली आपूर्ति के लिए गैर-पारंपरिक ऊर्जा को प्राथमिकता देते हुए अब तक किए गए दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौतों में लगभग 65 प्रतिशत हरित ऊर्जा को शामिल किया है।

​इसके साथ ही, सभी किसानों को दिन के समय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ‘मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2.0’ के माध्यम से विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत (Decentralized) सौर ऊर्जा उत्पादन परियोजनाओं से 16,000 मेगावाट क्षमता का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में 5,500 मेगावाट से अधिक क्षमता की परियोजनाएं चालू हो चुकी हैं, जिनके माध्यम से राज्य के 15 लाख से अधिक किसानों को दिन में बिजली आपूर्ति मिल रही है।

​इसके अलावा, ‘मागेल त्याला सौर कृषिपंप योजना’ (मांगने पर सौर कृषि पंप योजना) के तहत 10 लाख से अधिक 'ऑफ-ग्रिड' सौर कृषि पंप स्थापित किए जा चुके हैं। वहीं रूफटॉप (छत पर लगे) सौर ऊर्जा परियोजनाओं के माध्यम से राज्य के 9 लाख से अधिक परिवारों का बिजली बिल शून्य या लगभग मुफ्त हो गया है।