एक खबर जो पार्टी के भीतर प्रफुल्ल पटेल का प्रभाव पहले की तरह दर्शाती है और संगठनात्मक मामलों में उनकी राय कितना निर्णायक महत्व रखती है।
खबर- छगन भुजबल की एक शर्त से निकली राजेंद्र जैन की लॉटरी, सुनेत्रा पवार ने मानी प्रफुल्ल पटेल की सलाह
Curated by: अचलेंद्र कटियार|नवभारतटाइम्स.कॉम•
मुंबई : महाराष्ट्र की सीएम सुनेत्रा पवार के इस्तीफे के कारण खाली हुई राज्यसभा सीट के लिए एनसीपी ने पूर्व एमएलसी राजेंद्र जैन ने सोमवार को नामांकन दाखिल किया। विपक्षी महाविकास आघाडी ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है, इसलिए राजेंद्र जैन का निर्विरोध राज्यसभा सदस्य चुना जाना भी तय हो गया है। केंद्रीय चुनाव आयोग चुनाव परिणाम की आधिकारिक घोषणा 18 जून को करेगा। इस सीट के लिए एनसीपी के मंत्री छगन भुजबल ने दावेदारी की थी, मगर उनकी एक शर्त के कारण राजेंद्र जैन की लॉटरी निकल गई। इन दावों के बीच प्रफुल्ल पटेल ने अपने कैंडिडेट राजेंद्र जैन को उम्मीदवार बनवाकर संदेश भी दे दिया कि पवार फैमिली में अभी भी वह किनारे नहीं किए गए हैं।
भुजबल जाना चाहते थे दिल्ली
अजित पवार के रहते हुए मौजूदा डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार 21 जून 2024 को महाराष्ट्र से राज्यसभा सदस्य बनी थीं। उनका राज्यसभा कार्यकाल मूल रूप से 4 जुलाई 2028 तक था। लेकिन जनवरी में महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने 26 मई 2026 को राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था। इस तरह राजेंद्र जैन का राज्यसभा कार्यकाल 4 जुलाई 2028 तक रहेगा। छगन भुजबल इस सीट से दिल्ली की राजनीति में एंट्री चाहते थे, लेकिन बात नहीं बन पाई। इसकी जगह उनकी प्रतिक्रिया में भी झलकी। जब उन्होंने कहा कि मैं शतरंज नहीं कबड्डी का खिलाड़ी हूं। उधर जब सुनील तटकरे ने राजेंद्र जैन के नाम का ऐलान किया तो भुजबल की मौजूदगी में किया। उन्होंने कहा कि वे साफ बोलते हैं। पार्टी के उनकी वरिष्ठता का सम्मान करेगी।
शर्त ने तोड़ा छगन भुजबल का प्लान
सूत्रों के अनुसार एनसीपी की कोर कमेटी की बैठक में मंत्री छगन भुजबल ने स्वयं राज्यसभा जाने और बेटे समीर भुजबल को अपनी जगह राज्य में मंत्री बनाए जाने का प्रस्ताव रखा। इस पर कोर कमेटी में सहमति नहीं बन पाई। सूत्रों के मुताबिक सुनेत्रा पवार ने कहा कि जनता में इसका गलत मैसेज जाएगा। लोग कहेंगे कि एनसीपी पारवारिक पार्टी बन गई है सभी नेता अपने परिवार को पार्टी में सेट करने में लगे हैं। आम कार्यकर्ताओं को पार्टी में उचित स्थान नहीं मिल रहा है। एक अन्य नेता ने कहा कि भुजबल यदि राज्यसभा जाना चाहते हैं तो जाएं लेकिन उनकी जगह बेटे को मंत्री बनाए जाने की शर्त न रखें। कोर कमेटी में काफी बहस हुई। इसी बीच प्रफुल्ल पटेल की ओर से राजेंद्र जैन का नाम आगे कर दिया गया।आखिरी में कोर कमेटी ने पूर्व एमएलसी राजेंद्र जैन को राज्यसभा भेजे जाने पर मुहर लगाई। राजेंद्र जैन प्रफुल्ल पटेल के करीबी हैं।
प्रफुल्ल पटेल अपनी पकड़ साबित की
अजित पवार के वक्त पर नंबर दो की हैसियत रखने वाले प्रफुल्ल पटेल ने राजेंद्र जैन का राज्यसभा का कैंडिडेट बनवाकर अपनी पकड़ दिखाई है। पिछले काफी समय से यह चर्चा चल रही थी कि सुनेत्रा पवार ने तटकरे और प्रफुल्ल पटेल को किनारे कर दिया है। जैन की उम्मीदवारी से प्रफुल्ल पटेल ने इस बन रही धारणा को तोड़ दिया है। राजेंद्र जैन मूल रूप से गोंदिया जिले से हैं। भंडारा-गोंदिया स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र से दो बार वर्ष 2004 और 2010 में एमएलसी रहे। 2004 में राजेंद्र जैन के एमएलसी जीत को प्रफुल पटेल के प्रभाव से जोड़कर देखा गया था। राजेंद्र जैन की उम्मीदवारी से विदर्भ में पार्टी को कुछ फायदा मिल सकता है लेकिन भुजबल की एक शर्त ने प्रफुल्ल पटेल की राह आसान कर दी। वरिष्ठता में छगन भुजबल प्रफुल्ल पटेल से अधिक सीनियर हैं।
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