3 करोड़ के भ्रष्टाचार का मामला - पूर्व सरपंच सोनू घरडे का प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पलटवार
गोंदिया/गंगाझरी- गंगाझरी ग्राम पंचायत में 3 करोड़ के तथाकथित भ्रष्टाचार को लेकर चल रहे आरोप -प्रत्यारोप के बीच कल दि 6 जून को ली गई प्रेस काँन्फ्रेंस के दौरान लगाए गए आरोप का खंड़न करते हुए पूर्व सरपंच सोनू घरडे ने उन आरोपों को बेबुनियाद बताया।
विगत लंबे समय से "गंगाझरी ग्राम में हुए विकास को लेकर हो रही सियासत के कारण मामला गरमाया हुआ है।ग्राम पंचायत के पूर्व सदस्य हेमंत बघेल और रामचिंग पंधरे ने पूर्व सरपंच सोनू घरडे पर आरोप लगाए है कि उनके द्वाराुनके कार्यकाल के दौरान 3 करोड़ के तथाकथित भ्रष्टाचार हुआ है। भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद अब पूर्व सरपंच और वर्तमान ग्राम पंचायत प्रशासक सोनू घरडे ने प्रेस कॉस कर इन आरोपों का कंड़न करते हु बताया कि ुनके पास सारे कागजी सबूत मौजूद है और लोगों के द्वारा लगाए जा रहे आरोपों में दम नहीं है। सोनू घरडे ने दस्तावेजी सबूत पेश करते हुए सभी आरोपों को निराधार बताया है।
विगत्गों जिनों गोंदिया तहसील 'स्मार्ट ग्राम पंचायत' गंगाझरी में विरोध कर रहे कुछ लोगों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के द्वाराग्राम पंचायत प्रशासक (और पूर्व सरपंच) सोनूभाऊ विनायक घरडे और ग्राम पंचायत अधिकारी डी. के. महाकालकर पर वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उस वार का पलटवार प्रशासक सोनूभाऊ घरडे की ओर से अब सामने आया है। उन्होंने एक विस्तृत स्पष्टीकरण जारी कर सभी आरोपों को बेबुनियाद, गुमराह करने वाला और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है।
विपक्षी प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए आरोपों में जिन बड़ी वित्तीय अनियमितताओं का ज़िक्र किया गया था।उनमें विसंगतियाँ सामने आईं है। भ्रष्टाचार की राशी अलग-अलग समय पर अलग-अलग रकम बताईं जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि जहाँ लिखित शिकायत में ₹3 करोड़ के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया था, वहीं अन्य दावों में 1 करोड़ रु. से लेकर 70-80 लाख रु.तक के आँकड़े बता कर जिससे ग्रामीणों को गुमराह करने की कोशिश का पता चलता है।
ई-टेंडरिंग और सामग्री खरीद की प्रक्रियाओं के बारे में भी स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि कि सारी खरीद सरकारी नियमों के अनुसार की गई थी, जिनके तहत ई-टेंडर, कोटेशन या GeM पोर्टल के माध्यम से खरीद करना अनिवार्य है। इस बात के दस्तावेज़ी सबूत मौजूद हैं कि अलग-अलग तारीखों पर ई-टेंडरिंग प्रक्रियाएँ पूरी की गईं खासकर 'यू.के. इलेक्ट्रिकल' से जुड़ी प्रक्रियाएँ।
आदिवासी सांस्कृतिक भवन के निर्माण के संबंध में बताया गया कि प्रारंभिक जाँच पहले ही की जा चुकी है और ग्राम पंचायत के पास इस परियोजना के लिए प्राप्त सभी फंड और किए गए भुगतान का रिकॉर्ड मौजूद है। यह जानकारी भी दी गई कि ज़िला परिषद को मूल दस्तावेज़ों के लिए अनुरोध पत्र भी भेजा गया है।
ग्राम पंचायत भवन की मरम्मत के काम में भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाले जानते है कि मासिक बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित होने के बाद ही काम शुरू किया गया था और सभी ज़रूरी प्रशासनिक व वित्तीय प्रक्रियाएँ विधिवत पूरी की गई थीं। इसी तरह, य वृक्षारोपण और ट्री गार्ड की खरीद से संबंधित सभी खर्च विभिन्न सरकारी योजनाओं के नियमों का पालन करते हुए किए गए थे। यह भी बताया गया कि "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान के तहत 1,200 पेड़ लगाए गए थे।
घरडे ने सरकारी ज़मीन की बिक्री से जुड़े आरोपों का भी खंडन किया। उन्होंने बताया कि सरकारी नीतियों के अनुसार कार्रवाई की गई, जिसका मकसद भूमिहीन लाभार्थियों को ज़मीन देना, ग्राम पंचायत की आय बढ़ाना, अतिक्रमण रोकना और स्थानीय स्तर पर रोज़गार पैदा करना था। इन कामों के लिए मंज़ूरी ग्राम सभा और मासिक बैठकों के ज़रिए ली गई थी।
ग्राम पंचायत अधिकारी डी. के. महाकालकर पर भ्रष्टाचार के आरोपों को भी पूरी तरह बेबुनियाद बताकर खारिज कर दिया गया। यह साफ़ किया गया कि उन्हें ग्राम पंचायत के प्रस्ताव के ज़रिए वित्तीय अधिकार दिए गए थे और उन पर लगाए गए आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं था।
इस मौके पर, घरड़े ने आरोप लगाने वाले कुछ लोगों पर गंभीर जवाबी आरोप लगाए। यह दावा किया गया कि कुछ शिकायतकर्ताओं ने सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ा किया, अवैध निर्माण किए, सरकारी संपत्ति का गलत इस्तेमाल किया और ग्राम पंचायत पर दबाव बनाने की कोशिश की। कई बार उन्हं रोक कर गाली देने व मारने की धमकी देने की शिकायत भी उन्होंने गंगाझरी थाने में दर्ज करवाई है। उन्होंने कहा कि ये आरोप बदले की भावना से लगाए जा रहे हैं. पिछले पाँच सालों में ग्राम पंचायत ने कई विकास कार्य पूरे किए हैं, और आरोप लगाया कि कार्यकाल खत्म होने के बाद लगाए गए ये अचानक आरोप राजनीतिक मकसद से प्रेरित हैं, जिनकी नज़र आने वाले ग्राम पंचायत चुनावों पर है। ग्राम पंचायत के सदस्यों को जानकारी में न रखने के आरोपों का भी खंडन किया गया; बताया गया कि सभी बैठकों के लिए अटेंडेंस रजिस्टर, हस्ताक्षर और GPS-टैग वाली तस्वीरें मौजूद थीं।
प्रशासक सोनूभाऊ विनायक घरडेने कहा कि कुछ लोगों ने ग्राम पंचायत की छवि खराब करने की साज़िश रची थी; इसलिए, संबंधित लोगों के खिलाफ गंगाज़री पुलिस स्टेशन में मामले दर्ज किए गए हैं और अदालत में मानहानि के मुकदमे दायर किए गए हैं।

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