अब पत्रकारिता का सफर नहीं आसान ......

डिजिटल मीडिया को आचार संहिता के दायरे में लाने नए ड्राफ्ट की तैयारी

डिजिटल मीडिया को आचार संहिता के दायरे में लाने, डिजिटल कंटेंट पर अब सरकार की निगरानी और पकड़ पहले से  ज्यादा मजबूत होगी

डिजिटल कंटेंट पर अब सरकार की निगरानी और पकड़ पहले से कहीं ज्यादा मजबूत करने सूचना मंत्रालय ने प्रस्तावित संशोधन पर आम जनता और स्टेकहोल्डर्स से राय मांगी है। इसके लिए 14 अप्रैल, 2026 तक का समय दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर फैलने वाली खबरों की जवाबदेही तय करना है।

अगर आप सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं और अक्सर खबरें या करंट अफेयर्स शेयर करते हैं, तो यह खबर आपके लिए सबसे जरूरी है। केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियम, 2021 में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इस नए ड्राफ्ट का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो रजिस्टर्ड पब्लिशर नहीं हैं, लेकिन न्यूज कंटेंट शेयर करते हैं।सरकार यह साफ करना चाहती है कि न्यूज़ शेयर करने वाला हर व्यक्ति डिजिटल मीडिया आचार संहिता के दायरे में आए।इस ड्राफ्ट में नियम 14 को और मजबूत करने की बात कही गई है। इसके तहत एक अंतर-विभागीय समिति बनाई जाएगी। यह समिति न केवल शिकायतों पर गौर करेगी, बल्कि मंत्रालय द्वारा सीधे भेजे गए मामलों की भी जांच करेगी। 

इस बदलाव का सबसे बड़ा असर उन स्वतंत्र पत्रकारों और इन्फ्लुएंसर्स पर पड़ेगा जो बिना रजिस्ट्रेशन के खबरें चला रहे हैं। शहरों के लोकल न्यूज ग्रुप्स चलाने वाले लोगों के लिए अब कंटेंट शेयर करने से पहले सौ बार सोचना होगा। जानकारों का मानना है कि इससे अभिव्यक्ति की आजादी पर दबाव बढ़ेगा । 

30 मार्च 2026 को, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 में प्रस्तावित संशोधनों को प्रकाशित किया और 14 अप्रैल तक जनता से टिप्पणियाँ आमंत्रित कीं । भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मध्यस्थ शासन पर दूरगामी प्रभाव डालने वाले इन परिवर्तनों के लिए टिप्पणी अवधि मात्र पंद्रह दिन थी।  इन्हें "स्पष्टीकरणात्मक और प्रक्रियात्मक" बताया गया है, लेकिन ये ऑनलाइन अभिव्यक्ति पर कार्यकारी शक्ति का खतरनाक विस्तार दर्शाते हैं।                     

 प्रस्तावित संशोधनों को तत्काल वापस लेने की माँग -   विभिन्न संगठनों द्वारा इन प्रस्तावित संशोधनों को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए और देश के प्रत्येक नागरिक को इनकी वापसी की मांग करनी चाहिए तथा भारत के संविधान के साथ खड़ा होना चाहिए। ये प्रस्तावित संशोधन ऐसे समय में आए हैं जब भय का माहौल है और सरकार द्वारा निर्देशित सेंसरशिप, विशेष रूप से ऑनलाइन राजनीतिक भाषणों पर बढ़ाया जा रहा है।