आ अब लौट चले .......
शीर्ष माओवादी कमांडर पापा राव का आत्मसमर्पण
माओवादी कमांडर पापा राव 17 साथियों का आत्मसमर्पण,बस्तर में नक्सली आंदोलन लगभग खत्म जगदलपुर 25 मार्च - राजकपूर की फिल्म का गाना आ अब लौट चले.......माओवादी कमांडर पापा राव 17 साथियों के साथ आत्मसमर्पण पर एकदम फिट बैठता दिख रहा है। खबर लिखे जाने तक आत्मसमर्पण की तैयारी सुरु थी जो अब से थोड़ी देर पहले बस्तर में नक्सली आंदोलन लगभग खत्म की खहर के साथ पूर्ण हो गई है।
केंद्रीय गृहमंत्री द्वारा 31 मार्च 2026 तक नक्खसलवाद खत्म करने के लक्ष्य के सुरक्षा बलो को मिली जानकारी केअनुसार बस्तर के दशकों पुराने हिंसक अध्याय को संबालने वाले शीर्ष माओवादी कमांडर पापा राव के आत्मसमर्पण की तैयारी हो चुकी है। यदि ये होता है तो बस्तर में माओवादी हिंसा के अंत की खबर सच साबित हो जाएगी।
बताया जा रहा है कि अपने 17 साथियों के साथ पापा राव सारे हथियारों सहित समर्पण के लिए बस्तर के जंगल से बाहर निकल रहा है और उसे सुरक्षित लाने के लिए सुरक्षा बलों की विशेष टीम रवाना हो चुकी है। यदिपापाराव का यह कदम बिना किसी परेशानी के सफल होता है तो बस्तर में माओवादी हिंसा का निश्चित है। 25 लाख रुपये का इनामी नक्सली पापा राव पश्चिमी बस्तर डिवीजन का सचिव और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का महत्वपूर्ण सदस्य है उसके आत्मसमर्पण से नक्सली कैडर के मनोबल पर प्रभाव पड़ेगा और शेष लोग भी इसी राह पर आ सकते है।बस्तर में करीब 50 माओवादी ही सक्रिय बताए जा रहे हैं, जिनमें कोई बड़ा महत्वपूर्ण चेहरा नहीं बचा है। इसके मूल मे सरकार की पुनर्वास नीति और रोजगार के अवसरों ने युवाओं को मुख्यधारा की ओर आकर्षित किया है। इससे माओवादियों का सामाजिक आधार लगभग समाप्त हो गया है।


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